एक पग...

[Blog#2]

Update(2025): This can be considered one of the first poem written by me. I think I wrote this, when I was in Class IX and X. Here it is...


एक-एक पग बढाए जा,
मंजिल पा जाएगा
एक एक पग बढ़ाये जा,
मंजिल पा जाएगा |

मन में दृढ़ संकल्प हो ,
लक्ष्य तेरे संग हो,
एक-एक पग बढाए जा,
कोई न रोक पायेगा |
बस एक एक पग बढ़ाये जा,
मंजिल पा जाएगा ||

सामने खड़ा पहाड़ हो,
या अनंत समुद्र हो,
कोई न रोक पायेगा
बस एक-एक पग बढ़ाये जा |
मन में दृढ संकल्प हो,
तो पर्वत में भी रास्ता बन जाएगा,
समुद्र में भी सेतु बँध जाएगा
बस एक-एक पग बढ़ाये जा
मंजिल पा जाएगा |

मन में अटल निश्चय हो ,
तो पर्वत बौना पड़ जाएगा
समुद्र छोटा पड़ जाएगा,
बस एक एक पग बढ़ाये जा
कोई न रोक पायेगा
एक एक पग बढ़ाये जा,
मंजिल पा जायगा ||


Comments

  1. Nyc..brother👍
    अच्छा-अच्छा पढ़े और अच्छा-अच्छा लिखें।💚

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