एक ख्वाब...
[Blog#3.2]
Update(2025): This was also written a long time ago, when I was in class X. Here it is..
लोग कहा करते है कि
सुबह के ख्वाब जल्द ही पुरे होते है
पर मैंने भी देखे है अनेको ख्वाब
सुबह के सलोने नींद में
पर आज तक हुआ न एक भी पूरा
रह गया सारा अधूरा
तब कैसे मान ले कि
लोग सही कहा करते हैं
नहीं , मैं लोगों पर न उठा रहा सवाल
मैं तो हूँ एक वक्ता बेविचार
हो सकता है लोग कहा करते हैं सही
मुझसे ही है ख्वाबों की कोई दुश्मनी
जिससे वो कभी न होती पूरी
मैं कोशिश करूँगा कभी ख्वाबो से पूछने कि
ऐ मेरे प्यारे दोस्त ! क्यों हो ख़फ़ा
जो आज तक न हुए पूरा
तब सुन कहीं एक दोस्त की आवाज़ ,
ख़्वाब बढ़ा देती दोस्ती की हाथ ,
और पुरे हो जाते मेरे सारे ख्वाब
how is it ?????
ReplyDeleteGd going...keep it up👌
ReplyDeleteGud effort!!!
ReplyDeleteGo on...👍
👍💚
ReplyDeleteWonderful creation my dear.
ReplyDelete👏👏👏👏👏
ReplyDeleteVery nice poem
ReplyDeleteNice one
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